પ્રતિલિપિ પર અત્યાર સુધી પ્રસારિત થયેલા ઈન્ટરવ્યુંની એક ઝલક

एक छोटा सा वार्तालाप हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका श्री शील निगम जी के साथ / A short interview with a famous Hindi writer Mrs. Sheel Nigam

   एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने जीवन के हर सुख – दुःख को गले से लगाकर हँसते रहना सीखा है।  जिनके मन के हर कोने में सिर्फ दुसरो के लिए जीने की चाह बसी है। माँ से मिली प्रेरणा को जीवन भर की डगर बना लिया।  अपनी पहली पुस्तक  ” काव्य बीथिका ” प्रतिलिपि के मंच पे इ – बुक के रूप में प्रकाशित करवाने के लिए हम उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करते है। शील जी गद्य एवं पद्य दोनों की अच्छी जानकर हैं । आपका साहित्य में योगदान अमूल्य है।

हम आशा रखते है की आप की लेखन यात्रा ऐसे  ही अविरत आगे बढ़ती रहे।  पहली  पुस्तक के विमोचन पे प्रतिलिपि परिवार तथा उनके पाठकों की ओर से आपको बहुत बहुत बधाईयां।

    नाम : शील निगम
    जन्म दिवस : ६ दिसंबर, १९५२.
    मूलस्थान : आगरा (उत्तर प्रदेश).
    शैक्षणिक उपाधि : बी.ए., बी.एड.
1) स्वभाव : वैसे तो ठंडा है पर अगर कोई दोस्त धोखा दे या अपनी होशियारी दिखाए तो उससे ज़िंदगी भर के लिए दूर हो जाती हूँ. पहले मन बहुत भावुक हुआ करता था, ज़िंदगी के अनुभवों ने भावुकता तो कम कर दी पर फिर भी आँसुओं को पलकों के कोनों में छिपाकर रखती हूँ,गिरने कम देती हूँ ,पता था अनमोल मोती है फिर भी बह जाते थे पहले, अब  उन्हें मन में समा कर रखना सीख लिया है .
2) खास शौक : ‘मालिक’ को याद करना,’उनका’ शुक्रिया अदा करना,साहित्यिक रचनाएँ  लिखना, अच्छा खाना पकाना व सबको प्रेम से  खिलाना  और बच्चों से प्रेम करना.
3) अतिप्रिय व्यक्ति : सभी ‘अपने’ अतिप्रिय हैं, किस-किस का नाम लूँ ?
4) साहित्यिक प्रेरणा : बचपन में अपनी माँ से मिली, उसके बाद  ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों से और अंत में अपने बच्चों से, जिन्होंने मुझे मेरा लिखा साहित्य कंप्यूटर पर एकत्र करना सिखाया और  उसे  देश-विदेश के सुधि पाठकों तक पहुँचाने में  मेरी  मदद की .
5) पसंदीदा परिवेश : ‘अपना’ घर, परिवार, कुछ खास मित्र और साहित्यिक परिवेश.
6) पसंदीदा व्यंजन :  ज्यादातर अपने द्वारा ही पकाया हुआ भारतीय(शाकाहारी) और चायनीज़(शाकाहारी ) भोजन.
7) प्रकाशित रचनायें : साझा संकलन–‘अनवरत’, ‘चौदह काव्य रश्मियाँ’, ‘प्रेमाभिव्यक्ति’,’मुंबई के कवि’,’सिर्फ तुम’, देश-विदेश की  अनेक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों और पुस्तकों  में कविता, कहानी, आलेख तथा  साक्षात्कार प्रकाशित, (विशेष रूप से भारत, इंग्लॅण्ड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया),आकाशवाणी और ज़ी टी.वी. पर कहानियाँ  प्रसारित, ‘टेम्स की सरगम’ उपन्यास का अंग्रेज़ी में अनुवाद तथा  ‘स्पंदन’ मराठी फ़िल्म का हिंदी स्क्रीनप्ले लेखन.
8) मन पसंद टी.वी. प्रोग्राम : ‘जोधा-अकबर,’कौन बनेगा करोड़ पति’ और देश-दुनियाँ  के समाचार.
9) बटुए में हमेशा किसकी फोटो रखती हैं : सॉरी ,बटुआ है ही नहीं है तो फोटो किसकी रखूँ? वैसे दिल में  कई सारी ‘अपनों’ की तस्वीरें बसा रखीं हैं जो उम्र भर साथ रहेंगी.
10) प्यार की परिभाषा : मेरी एक  कविता ‘प्यार के सोपान’ में दी गयी है जो काफी लम्बी है- ‘प्यार  अतृप्ति का ही दूजा नाम है,जो कभी तृप्त नहीं होता’.
प्यार के सोपान
दिल की गहरी गुफाओं में, कंदराओं में,
जब भावनाएं टकराती हैं एक दूजे के लिए,
तो एक कशिश बाँध लेती है उन्हें….
और एक प्रतिध्वनि उभरती है…..
हाँ ! यही प्रतिध्वनि तो प्यार है.
प्यार एक प्रतिध्वनि है.
मन के गहरे कुहासे से उभर कर,
यह प्रतिध्वनि दिल के रास्ते से हो कर,
मन, मस्तिष्क और शरीर को
समर्पित कर देती है एक दूजे पर,
हाँ ! यही समर्पण तो प्यार है.
प्यार एक समर्पण है.
समर्पण के मधुर क्षणों में आकर्षण,
जब अलग नहीं होने देता एक दूजे से,
तो अपूर्णता और पूर्णता के समागम से,
एक तृप्ति जन्म लेती है मन में,
हाँ ! यही तृप्ति तो प्यार है.
प्यार एक तृप्ति है.
इस तृप्ति को बार-बार पाने के लिए,
जब दिल मचलता है बार-बार
पाने के लिए एक-दूजे को हर बार,
तब बंधनों की मर्यादा में बंध कर,
तृप्ति से ही जन्म लेती है अतृप्ति.
हाँ ! यही अतृप्ति तो प्यार है.
प्यार  अतृप्ति का ही दूजा नाम है,
जो कभी तृप्त नहीं होता.

Published works on Pratilipi :

    


Advertisements

One thought on “પ્રતિલિપિ પર અત્યાર સુધી પ્રસારિત થયેલા ઈન્ટરવ્યુંની એક ઝલક

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s