प्रतिलिपि पे प्रकाशित १० हिन्दी कहानियाँ जो आपको अवश्य पढ़नी चाहिये

प्रतिलिपि पे प्रकाशित १० हिन्दी कहानियाँ जो आपको अवश्य पढ़नी चाहिये

 ये १० कहानियाँ, वो कहानियाँ हैं जो मुझे बेहद पसंद आई हैं, और मुझे आशा है की आपको भी उतनी ही पसंद आयेंगी,

रणजीत|

1. …ओ अलबर्ट ! :

कमल जी की ये कहानी, अलबर्ट तिर्की नाम के एक बैंक कर्मचारी की कहानी है, जिसका तबादला रांची से दुमका नाम के एक छोटे से कस्बे में हो गया, वहां जाकर उसने बैंक लोन की ऐसी कहानी देखी जिसने उसके पूरे जीवन में तहलका मचा कर रख दिया |

2. अपशब्द:

शायद प्रतिलिपि पे प्रकाशित सबसे छोटी कहानियों में से एक, लेकिन चंद पंक्तियों में ही ये लघुकथा बहुत कुछ कह जाती है|

3. अलग्योझा:

हिन्दी के महानतम लेखकों में से एक मुंशी प्रेमचंद की ये कहानी उनकी अन्य कहानियों की अपेक्षा में शायद बहुत कम पढ़ी गयी है, लेकिन ये किसी भी दूसरी कहानी से कम नहीं है। एक संयुक्त परिवार में बेटे की शादी के बाद कैसे परिवर्तन आते हैं और फिर जब अलगाव होता है तो सबकी जिंदगी कैसे एक नया मोड़ लेती है, इस बात को बयान करती हुई ये कहानी निश्चय ही प्रेमचंद की सर्वोत्तम कहानियों में से एक है।

4. ईदगाह: 

मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के सबसे चहेते लेखक हैं और ईदगाह उनकी सबसे चहेती कहानी, निश्चय ही आपने ये कहानी बचपन में पढ़ी होगी लेकिन ये कहानी कुछ ऐसी ही की जब भी और जितनी बार भी पढ़ें हर बार उतनी ही अच्छी लगती है।

5. उसने कहा था:

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की ये लघुकथा आधुनिक हिन्दी भाषा की पहली लघुकथा मानी जाती है, भले ही ये विवादास्पद तथ्य हो लेकिन ये निर्विवाद रूप से माना जाता है की ये हिन्दी की आज तक की सर्वोत्तम लघुकथाओं में से एक है।

6. गुंडा:

जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के सबसे जाने माने रचनकारों में से एक हैं, ये कहानी उनकी सबसे पसंदीदा कहानियों में से है।गुंडा कहानी है एक पचास साल के ‘युवक’ की, जो काशी का गुंडा था, गुंडा यानीअपनी बात पर मिटना, सिंह-वृत्ति से जीविका ग्रहण करना, प्राण-भिक्षा माँगनेवाले कायरों तथा चोट खाकर गिरे हुए प्रतिद्वन्द्वी पर शस्त्र न उठाना, सताये निर्बलों को सहायता देना और प्रत्येक क्षण प्राणों को हथेली पर लिये घूमना, यही उसका बाना था…

7.  खुल जा सिमसिम:

धीरेन्द्र अस्थाना की ये कहानी आपको अपने साथ कौशल, कामिनी और पुष्पा की एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां ये समझ पाना की कौन सही है और कौन गलत बहुत ही मुश्किल हो जाता है।  हम सभी ने पढ़ा है की खुल जा सिमसिम बोलने से कैसे तिलिस्म के दरवाजे खुल जाते हैं, लेकिन जिंदगी का तिलिस्म कहीं ज्यादा कठिन होता है, चंद जादू के शब्दों से उसके दरवाजे हिलते भी नहीं।

8. छोटा जादूगर:

जयशंकर प्रसाद की ये लघुकथा मुझे बचपन से ही बहुत पसंद रही है, लेकिन इसका असली मतलब मुझे तब समझ आया जब मैने मनोविज्ञान एवं दर्शनशाश्त्र की अनेकानेक पुस्तकें पढ़ लीं, या शायद अभी भी पूरी तरह समझ नहीं आई। बहुत ही सीधे और नापे तुले शब्दों में एक क्षोटा सा बच्चा वो सिखा जाता है जिसे सीखने में अक्सर लोगों का पूरा जीवन निकल जाये।

अंशु त्रिपाठी की ये लघुकथा हर आदमी(एवं औरत) के भीतर की सबसे आधरजनित भावनाओं की कहानी सुनाती है, ये दिखती है कि कोई भी कहीं पर भी क्यूं ना पहुंच जाये वो ईर्ष्या और डाह कि पहुंच से बहुत दूर नहीं जा पाता.
शील निगम की ये कहानी एक ऐसी औरत की दास्तान है जिसे अपनी एक गलती की वजह से पूरी जिंदगी ग़म झेलने पड़े, लेकिन वो अपनी बेटी को भी जब उन्ही ग़मों के रास्ते जाते देखती है तो उससे रहा नहीं जाता और हालातों को अपने हाथ में लेना ही पड़ता है।

प्रतिलिपि पे आपकी पसंदीदा कहानियाँ कौन सी हैं मुझे  ranjeet@pratilipi.com पर मेल करके जरूर बतायें।

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